Friday, 21 August 2020

योगिता हत्याकांड: हत्या के बाद शव के साथ ये घिनौनी हरकत करने वाला था विवेक, अचानक आ गए बच्चे और फिर...


आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज की जूनियर डॉक्टर योगिता गौतम की हत्या के मामले में हिरासत में लिए गए मेडिकल ऑफिसर डॉ. विवेक तिवारी ने बृहस्पतिवार को पुलिस पूछताछ में वारदात करना कुबूल कर लिया। उसने बताया कि उसने हत्या कार में ही कर दी थी। योगिता से पूछा था कि वह उससे शादी करेगी या नहीं, जैसे ही उसने मना किया, वैसे ही गला दबा दिया। नहीं मरी तो सिर में रिवाल्वर से गोली मारी, इसके बाच चाकू से गर्दन पर वार किया। शव को डौकी में फेंककर जलाने की कोशिश की लेकिन किसी के आ जाने के डर से उरई भाग गया। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
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बतौर जूनियर डॉक्टर काम कर रही एमएस की छात्रा योगिता गौतम का शव बुधवार सुबह डौकी में मिला था। वह नूरी दरवाजा स्थित लेडी लॉयल के सामने किराए के मकान में रहती थी। दिल्ली की शिवपुरी कॉलोनी पार्ट - 2 निवासी पिता अंबेश कुमार गौतम राजस्थान के उदयपुर में नवोदय विद्यालय समिति में डिप्टी कमिश्नर हैं। भाई डॉ. मोहिंदर कुमार ने एमएम गेट थाना में हत्या की रिपोर्ट अज्ञात में दर्ज कराई लेकिन शक उरई, जालौन में तैनात मेडिकल ऑफिसर विवेक तिवारी पर जताया।    

विवेक कानपुर के किदवई नगर का रहने वाला है। उसके पिता वीके त्यागी डिप्टी एसपी थे। सेवानिवृत्ति के बाद उनकी मौत हो चुकी है। पुलिस ने विवेक को उरई से हिरासत में लेकर पूछताछ की। सीओ कोतवाली चमन सिंह चावड़ा ने बताया कि  डॉ. योगिता और विवेक मुरादाबाद की तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस में साथ थे, विवेक एक साल सीनियर था। वहीं से दोनों में दोस्ती हो गई। विवेक ने पूछताछ में बताया कि वह और योगिता शादी के लिए राजी थे, लेकिन वह चाहता था कि पहले बहन नेहा की शादी हो जाए।  

योगिता एससी है, वह ब्राह्मण है, इसलिए उसे लगता था कि अगर एससी युवती से शादी की तो बहन का शादी होना मुश्किल हो जाएगा। इससे योगिता को लगा कि वह शादी के नाम पर धोखा दे रहा है, इसलिए उससे बात करना बंद कर दिया। इस पर वह मंगलवार की शाम साढ़े छह बजे कार से आया। योगिता को उसके घर से ही ले गया। रास्ते में झगड़ा होने पर उसकी हत्या कर दी।
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मुझे लगा वह किसी और को चाहने लगी है... डॉ. विवेक तिवारी ने पुलिस को बताया कि योगिता ने एक साल पहले उससे शादी करने से इनकार कर दिया था। इसके बाद वह उसे फोन करता तो वह रिसीव नहीं करती। नंबर ब्लॉक कर दिया। वह नंबर बदल बदलकर फोन करता तो उसका फोन चार-चार घंटे व्यस्त मिलता। उसे लगा कि वह किसी और को चाहने लगी है, इसलिए हत्या की साजिश रची। 

 डॉ. विवेक तिवारी ने बताया कि वह योगिता के शव को जलाना चाहता था, ताकि पहचान न हो पाए। उसने शव पर लड़कियां रख दी थीं, गीली होने के कारण उसमें आग नहीं लगी। समय बीतने पर उसे डर लगा कि कोई न जाए, तभी बच्चे आ गए, इसलिए वहां से भाग गया और अपनी कार से उरई पहुंच गया। मुजफ्फरनगर, नोएडा, रुद्रप्रयाग में पढ़ी थी योगिता योगिता के पिता नवोदय विद्यालय में कई जगह प्रधानाचार्य रहे। योगिता उन स्कूलों में ही पढ़ी। उसने आठवीं तक रुद्रप्रयाग के जवाहर नवोदय विद्यालय से पढ़ाई की। दसवीं मुजफ्फरनगर और बारहवीं नोएडा से की।  
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